Defense PSU Company GRSE – भारत में रक्षा से जुड़े जहाज़ बनाने वाली प्रमुख सार्वजनिक कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने हाल ही में अपने आने वाले वर्षों की दिशा को साफ किया है। कंपनी ने बताया है कि उसके पास लगभग ₹50,000 करोड़ की ऑर्डर बुक पाइपलाइन तैयार है। साथ ही उसने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 25 से 30 प्रतिशत तक की रेवेन्यू बढ़त का अनुमान रखा है। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने पर ज़ोर दे रहा है। कंपनी का यह कदम देश की रक्षा क्षमता में बड़ा योगदान देने वाला माना जा रहा है।
GRSE का शेयर बाज़ार में मज़बूत प्रदर्शन
कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹28,300 करोड़ है। इसके शेयर शुक्रवार को ₹2,471 पर बंद हुए, जो इसके लंबे समय के प्रदर्शन को मज़बूत दिखाते हैं। पिछले पाँच सालों में इस शेयर ने करीब 1147 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इसका 52 हफ़्तों का ऊपरी स्तर ₹3,538.40 रहा है। इन आँकड़ों से यह साफ दिखता है कि निवेशकों ने कंपनी पर भरोसा बनाए रखा है और उसे आगे भी अच्छे रिटर्न की उम्मीद है। कंपनी का शेयर प्रदर्शन यह बताता है कि उसका व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है और रक्षा क्षेत्र में उसकी भूमिका मजबूत हो रही है।
GRSE की ₹50,000 करोड़ की ऑर्डर बुक
कंपनी की मैनेजमेंट टीम का कहना है कि आने वाले समय में उसकी ऑर्डर बुक और भी बड़ी हो सकती है। अभी GRSE की कुल ऑर्डर बुक 30 सितंबर 2025 तक ₹20,205.56 करोड़ दर्ज की गई है। Garden Reach Shipbuilders & Enginers के पास कुल 10 शिपबिल्डिंग परियोजनाएँ हैं, जिनमें 43 प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसके काम में 83 प्रतिशत हिस्सा रक्षा क्षेत्र से आता है, जिससे साफ होता है कि भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड में कंपनी की भूमिका बहुत अहम है।
GRSE की ऑर्डर बुक में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें P-17A फ्रिगेट्स के लिए लगभग ₹9,500 करोड़, ASW शैलो वाटर क्राफ्ट के लिए ₹3,075 करोड़, नेक्स्ट-जेन ऑफशोर पेट्रोल वेसल के लिए ₹3,250 करोड़ और जर्मन मल्टी-पर्पज़ वेसल्स के लिए लगभग ₹5,400 करोड़ के ऑर्डर शामिल हैं। मैनेजमेंट ने बताया कि आने वाले 15 से 18 महीनों में ऑर्डर पाइपलाइन ₹75,000 करोड़ के स्तर को भी पार कर सकती है।
GRSE के तिमाही नतीजे और वित्तीय स्थिति
दूसरी तिमाही FY26 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹1,677 करोड़ पहुँच गया, जो पिछले साल के ₹1,153 करोड़ की तुलना में 45.45 प्रतिशत की बढ़त दिखाता है। GRSE का नेट प्रॉफिट भी बढ़कर ₹154 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹98 करोड़ था। यानी कंपनी का लाभ 57.14 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी का ROCE 36.6 प्रतिशत और ROE 27.6 प्रतिशत है, जो उसके मज़बूत संचालन और बेहतर रिटर्न क्षमता का संकेत देता है।
GRSE का डेट-टू-इक्विटी अनुपात सिर्फ 0.01x है, जिससे यह लगभग डेट-फ्री मानी जाती है। यह बात उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाती है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स आज देश की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है और आने वाले वर्षों में इसका योगदान और बढ़ने की उम्मीद है।
(यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है, इसलिए इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में ना लें। कोई भी निवेश करने से पूर्व अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह ज़रूर करें)